शहद: अपवित्रता से पवित्रता की ओर
धार्मिक ग्रंथों में अक्सर कुछ ऐसी वस्तुएँ बताई गई हैं जो प्रकृति में अपवित्र मानी जाती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें पवित्र माना गया है। इसका एक मिसाल है – शहद।
शहद की उत्पत्ति के बारे में जानकर अक्सर लोग हैरान होते हैं। मधुमक्खियाँ फूलों के रस को चूसकर अपने पेट में लाती हैं और फिर वह रस पचकर शहद में बदल जाता है। तकनीकी तौर पर, यह प्रक्रिया जैविक उल्टी के जरिए होती है, जिसे कई लोग अपवित्र मान सकते हैं। लेकिन फिर भी शहद को पवित्र और आशीर्वाद माना जाता है।
यहीं पर ईश्वर की विशेष कृपा दिखाई देती है। वह ऐसी चीज़ को भी स्वस्थ और पवित्र बना देता है जिसकी उत्पत्ति सामान्य नज़र से अशुद्ध लगे। शहद न सिर्फ स्वाद में मीठा है, बल्कि यह शरीर के लिए भी बहुत फायदेमंद है। यह कफ, खांसी और पाचन संबंधी समस्याओं में आराम देता है।
इसलिए, पवित्रता कभी सिर्फ बाहरी रूप या उत्पत्ति नहीं होती, बल्कि उसका उद्देश्य
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