भारत में जाति और वाल्मीकि समुदाय
भारतीय समाज ऐतिहासिक रूप से जाति के आधार पर विभाजित रहा है। इस व्यवस्था में वाल्मीि या भंगी समुदाय को पारंपरिक तौर पर सबसे नीचे रखा गया। इन्हें अछूत कहा जाता था और उनका मुख्य काम मानव मल की सफाई करना रहा है।
यह काम न केवल शारीरिक रूप से कठिन है, बल्कि सामाजिक रूप से इतना अपमानजनक माना जाता था कि इसके कारण इन लोगों को समाज के मुख्यधारा से अलग रखा जाता था। गांधीजी ने इन्हें हरिजन कहकर सम्मान देने की कोशिश की थी, लेकिन सदियों पुरानी मानसिकता बदलने में समय लगा।
आज भी कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वाल्मीकि समुदाय के लोग सीवर या शौचालय साफ करने का काम करते हैं। हालांकि संविधान में अस्पृश्यता को गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है और कई योजनाओं के जरिए इन समुदायों के उत्थान की कोशिश हुई है, फिर भी सामाजिक छूत और भेदभाव खत्म नहीं हुआ।
वाल्मीकि समुदाय के लोग अब शिक्षा, राजनीति और सेवा क्षेत्र में भी आग
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