मुगल काल का अनोखा खानाः "किताब खाना"

किताब खाना मुगल काल के भोजन संस्कृति का एक अनोखा और दुर्लभ पहलू था। इतिहास के पन्नों में जब भी मुगलों के भोजन का ज़िक्र होता है, तो अक्सर गोश्त, मुर्गी और मछली के व्यंजनों की बात होती है। लेकिन सच यह है कि मुगल बादशाहों का खान-पीन इससे कहीं ज़्यादा संतुलित और विविधतापूर्ण था।

इतिहासकारों के अनुसार, बादशाह अकबर हाथियों पर सवार होकर शिकार के शौक़ीन ज़रूर थे, लेकिन शिकार के बाद गोश्त खाने के प्रति उनका विशेष लगाव नहीं था। उनकी डाइट में सब्ज़ियां, दालें, फल और साग-पात का खास स्थान था। इसी तरह, जहांगीर और औरंगजेब भी सादा और पौष्टिक भोजन को वरीयता देते थे।

"किताब खाना" ऐसा नाम था जो उनके विशिष्ट भोजन शैली को दर्शाता है। हालांकि यह कोई वास्तविक व्यंजन नहीं था, बल्कि यह एक रूढ़ि थी जो मुगल दरबार के सूक्ष्म स्वाद और भोजन के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती थी। जहां एक ओर शाही दरबार में बिर

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