वारंट क्या हैं और कैसे प्रभावित करते हैं कंपनी के शेयरों का मूल्य?
जब कोई कंपनी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए वारंट जारी करती है, तो यह एक आकर्षक विकल्प लग सकता है। वारंट वह विकल्प होता है जो निवेशक को एक निर्धारित समय और कीमत पर कंपनी के शेयर खरीदने का अधिकार देता है। लेकिन इसके पीछे एक महत्वपूर्ण पहलू छिपा होता है – यह कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों के लिए जोखिम भी ला सकता है।
जब वारंट का उपयोग करके निवेशक नए शेयर खरीदते हैं, तो कंपनी को उनके लिए नए शेयर जारी करने पड़ते हैं। इससे कुल शेयरों की संख्या बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप, मौजूदा शेयरधारकों के हिस्से का अनुपात कम हो जाता है, जिसे पतला होना (dilution) कहते हैं।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपके पास कंपनी के 10% शेयर थे, लेकिन जब नए शेयर जारी हुए, तो आपका हिस्सा घटकर 8% रह गया। यह न केवल आपके मालिकाना हक में कमी लाता है, बल्कि शेयर के प्रति आय (Earnings Per Share) पर भी असर डाल सकता है।
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