आत्मा अमर है – कोई भी उसे नष्ट नहीं कर सकता

आत्मा की प्रकृति इतनी सूक्ष्म और अद्भुत है कि वह भौतिक दुनिया के किसी भी तत्व से प्रभावित नहीं होती। जब हम शरीर की बात करते हैं, तो वह जल्दी टूट सकता है, जल सकता है, गीला हो सकता है या सूख सकता है। लेकिन आत्मा तो वह अमूर्त सत्ता है जो इन सबसे परे है।

शस्त्र उसे काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती, जल गीला नहीं कर सकता और वायु सुखा नहीं सकती।

यह वचन गीता के अध्याय 2, श्लोक 23 से प्रेरित है, जहाँ भगवान कृष्ण अर्जुन को युद्ध के मैदान में जीवन और मृत्यु का गहरा सत्य बताते हैं। आत्मा न तो पैदा होती है और न ही मरती है। वह नित्य, शाश्वत और अविनाशी है। शरीर बदल सकता है, जन्म-मृत्यु के चक्र में घूम सकता है, लेकिन आत्मा कभी नष्ट नहीं होती।

इस सत्य को समझना मनुष्य को भय से मुक्त करता है। मौत का डर, घाव का डर, सब कुछ शरीर से जुड़ा है। आत्मा के अमर होने की समझ देती है अंतर की शांति। इसलिए जीवन में चुनौ

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