मनुष्य जन्म कितने जन्मों के बाद मिलता है?
हिन्दू धर्म के अनुसार आत्मा अमर है। वह एक शरीर छोड़कर दूसरे में जन्म लेती रहती है। इस प्रक्रिया को पुनर्जन्म कहा जाता है। कहा जाता है कि जीवात्मा 84 लाख योनियों में भटकती है, जिनमें पशु, पक्षी, जलचर और अन्य प्राणी शामिल हैं। इन सभी जन्मों के बाद जब आत्मा पवित्रता और चेतना के उच्च स्तर पर पहुँचती है, तब उसे मनुष्य जन्म मिलता है।
मनुष्य जन्म को विशेष माना गया है, क्योंकि यही एकमात्र योनि है जहाँ मनुष्य अपने कर्मों के आधार पर मुक्ति प्राप्त कर सकता है। अन्य योनियों में तो वह केवल अपने पुण्य या पापों का भोग करता है, लेकिन मनुष्यता में वह धर्म, ज्ञान और आध्यात्मिक तपस्या के माध्यम से जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो सकता है।
इसलिए कहा जाता है कि मनुष्य जन्म मिलना अत्यंत दुर्लभ है। इसे पाकर भी अगर व्यक्ति सार्थक जीवन न जिए, तो यह अवसर व्यर्थ चला जाता है। गीता में भी कृष्ण कहते हैं कि ज्ञान औ
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।