पिछले जन्म में क्या था?

यह सवाल कई लोगों के मन में आता है – पिछले जन्म में मैं कौन था? हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार, आत्मा अमर है। शरीर तो नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा नहीं मरती। जब किसी की मृत्यु होती है, तो आत्मा एक नए शरीर में जन्म लेती है। इसी प्रक्रिया को पुनर्जन्म कहा जाता है।

भगवद गीता और उपनिषद जैसे ग्रंथों में इसका वर्णन मिलता है। गीता में कृष्ण कहते हैं कि आत्मा न तो पैदा होती है और न ही मरती है। वह शरीर की तरह नश्वर नहीं है। जैसे कोई व्यक्ति पुराने कपड़ों को उतारकर नए पहनता है, वैसे ही आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरे में प्रवेश कर जाती है।

कर्म का सिद्धांत भी इससे जुड़ा है। मान्यता है कि जो कर्म हम इस जन्म में करते हैं, उसका फल हमें अगले जन्म में मिलता है। अगर जीवन में अच्छे कर्म किए गए, तो अगला जन्म बेहतर हो सकता है। लेकिन अगर बुरे कर्म किए, तो जीवन कठिनाइयों भरा हो सकता है।

हालांकि, पिछले जन्म की विस्तृत जानक

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय