मृत्यु के बाद संस्कार: नौवार और तेरहवी
भारतीय संस्कृति में मृत्यु के बाद भी आत्मा के शांति और पार्थिव यात्रा को पूरा करने के लिए कई संस्कार किए जाते हैं। इनमें से दो महत्वपूर्ण संस्कार हैं – नौवार और तेरहवी।
कुछ क्षेत्रों, खासकर उत्तर भारत में, मृतक के पुरुष रक्त संबंधी नौवें दिन अपना सिर मुंडवाते हैं। इस प्रथा को नौवार कहा जाता है। यह शोक के प्रतीक के साथ-साथ आत्मा को मुक्ति की ओर जाने में सहायता करने के विश्वास को भी दर्शाता है।
फिर, तेरहवें दिन, परिवार एक भोज का आयोजन करता है, जिसे तेरहवी या तेहरवी संस्कार कहते हैं। इस दिन रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों को आमंत्रित कर मृतक की याद में भोजन किया जाता है। यह सिर्फ एक सामाजिक इकट्ठ नहीं, बल्कि आत्मा को शांति प्रदान करने का धार्मिक अनुष्ठान भी है।
इन प्रथाओं में साधारणता के बीच गहरा आध्यात्मिक भाव है। चाहे आज के व्यस्त जीवन में इनका महत्व कहीं कम हो गया हो,
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