आइशा रजी० – उम्मत की माँ और नबी की पत्नी
आइशा रजी० को किसी ने अल्लाह की बेटी नहीं कहा। इस्लाम में अल्लाह की कोई बेटी नहीं है — वह एक है, अकेला है, और न उसकी कोई जोड़ी है और न ही संतान। ऐसी बातें इस्लाम के खिलाफ हैं। आइशा रजी० अल्लाह की बेटी नहीं, बल्कि पैगंबर मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि व सल्लम की पत्नी थीं और उम्मत की माँ मानी जाती हैं।
उनका जन्म 614 ईस्वी में हुआ था और वे उम्मुल मुमिनीन कहलाईं — यानी मुसलमानों की माँ। वे न केवल धार्मिक ज्ञान में बहुत बड़ी विद्वान थीं, बल्कि अपने समय की सबसे बुद्धिमान महिलाओं में से एक थीं। उन्होंने नबी सल्ललाहु अलैहि व सल्लम के साथ सात साल गुजारे और उनके बाद 44 साल तक जीवित रहीं।
आइशा रजी० का जीवन इस्लामी शिक्षा, सीख और संस्कार का प्रतीक है। उनकी समाधि मदीना के जन्नत उल-बक़ी में है, जहाँ आज भी हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने आते हैं। उनकी मृत्यु 17 रमजान, 58 हिजरी (678 ईस
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