कुरान की पहली आयत: 'बिस्मिल्लाह'
कुरान की पहली आयत को 'बिस्मिल्लाह अर्रहमान-अर्रहीम' कहा जाता है, जिसका अर्थ है – "अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ, जो अत्यंत दयालु और कृपालु है।" यह आयत न सिर्फ कुरान की पहली आयत है, बल्कि मुस्लिम जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। हर अच्छे काम की शुरुआत में इसे लेना मुस्लिम परंपरा का हिस्सा है।
यह आयत कुरान के हर एक सूरह (अध्याय) की शुरुआत में आती है, सिवाय सूरह तौबा के। इसकी महत्ता इतनी है कि इसे एक मुस्लिम के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग माना जाता है, चाहे वह घर से निकलते समय हो, खाना शुरू करते समय हो या कोई नया काम शुरू करते समय।
इस छोटी सी पंक्ति में अल्लाह के दो महत्वपूर्ण गुण – अर्रहमान (अत्यंत दयालु) और अर्रहीम (कृपालु) – शामिल हैं, जो उनकी करुणा और दया को दर्शाते हैं। यह न सिर्फ एक धार्मिक घोषणा है, बल्कि जीवन के प्रति समर्पण और विनम्रता की भावना को भी जगाती है।
ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इस्लाम त
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