मृत्यु के बाद शव-दाह का सही समय

हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद शव को जलाने के समय को लेकर कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताएँ हैं। विशेष रूप से यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसके शव को उसी रात नहीं जलाया जाता। परिवारजन शव को घर में ही रखते हैं और कोई न कोई व्यक्ति उसके पास रहता है। यह परंपरा आत्मिक शांति और आत्मा के मोक्ष के विश्वास पर आधारित है।

मान्यता है कि रात्रि में दाह-संस्कार करने से आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती और वह अधोगति की ओर जाती है। इसलिए दाह-संस्कार को अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है, चाहे मृत्यु रात में ही क्यों न हुई हो। यह नियम धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में गहराई से जुड़ा है।

कुछ क्षेत्रों में तो मृत व्यक्ति के पैरों के पास दीया भी जलाया जाता है, ताकि आत्मा को अंधेरे में न छोड़ा जाए। ये सभी रीति-रिवाज मृत व्यक्ति के आत्मा के लिए सम्मान और शांति की भावना को दर्शाते हैं।

अंततः,

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय