दुख के समय परमेश्वर कहां है?
दुख जीवन का एक ऐसा हिस्सा है जिससे कोई भी नहीं बच पाता। कभी कोई बीमारी, तो कभी नुकसान, कभी धोखा या अकेलापन—हम सबके जीवन में किसी न किसी रूप में आता है। ऐसे वक्त में दिल में सवाल उठता है—"भगवान कहां है?" क्या वह दूर हो गया है? क्या वह सुन नहीं रहा?
लेकिन सच यह है कि जब हम सबसे ज्यादा पीड़ित होते हैं, तब भी परमेश्वर हमसे दूर नहीं होता। वह न केवल पास होता है, बल्कि हमारे ठीक बगल में खड़ा होता है। उसका प्रेम इतना मजबूत है कि कोई भी चीज हमें उससे अलग नहीं कर सकती—न दुख, न डर, न ही निराशा।
कई बार वह अपनी कलीसिया के माध्यम से हमारे पास आता है—एक सहानुभूति भरा शब्द, एक सांत्वना भरा हाथ, या एक प्रार्थना के माध्यम से। वह हमें अपना प्रेम दिखाता है और हमारे जीवन में एक उद्देश्य देना चाहता है। उसका वचन हमें बताता है कि हर कष्ट में भी एक नया रास्ता, एक नई शुरुआत छिपी हो सकती है।
तो अगली बार जब दिल भारी लग
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