ईश्वर को पाने का मार्ग – प्रेम

ईश्वर को पाने की खोज मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य रहा है। लोग तप, जप, यज्ञ, दान और अनगिनत तपस्याएँ करते आए हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि ईश्वर को प्राप्त करने का सबसे सरल और सुगम मार्ग है – प्रेम

प्रेम भक्ति का प्राण है। जहाँ प्रेम होता है, वहाँ भक्ति स्वतः फूटती है। चाहे आप कितना भी जप कर लें, कितनी भी तपस्या कर लें, अगर हृदय में प्रेम नहीं है, तो ईश्वर की प्राप्ति असंभव है। प्रेम वह दीपक है जो अंधेरे को दूर करके ईश्वर की ओर मार्ग दिखाता है।

कई लोग सोचते हैं कि ईश्वर को पाने के लिए कठोर साधना या अत्यधिक त्याग ज़रूरी है। लेकिन सच तो यह है कि एक सरल, सच्चे प्रेम से भरा हृदय, बिना किसी ड्रामे के, ईश्वर के बहुत करीब पहुँच जाता है। जैसे मीरा ने प्रेम से उद्घोष किया – "मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरा न कोई..."। उनका प्रेम इतना शुद्ध था कि ईश्वर उनके सामने आ खड़े हुए।

तो ईश्वर को पाने के लिए ज़रूरी नहीं कि आप जंगल

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