भगवान शिव: जन्म-मृत्यु से परे
शिव जी की मृत्यु कैसे हुई? — यह प्रश्न कई बार सुनने को मिलता है, लेकिन शिव पुराण और हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार इसका जवाब साफ है।
भगवान शिव को स्वयंभू माना गया है, यानि वे स्वतः उत्पन्न हुए। उनका कोई आरंभ नहीं है, न ही अंत। वे न केवल विनाश के देवता हैं, बल्कि सृष्टि, स्थिति और प्रलय के स्वामी भी हैं।
मृत्यु तो उन जीवों के लिए होती है जो जन्मे हैं। लेकिन शिव जन्म ही नहीं लेते, इसलिए मृत्यु भी उनके लिए अनुपलब्ध है। वे अविनाशी हैं, अनादि और अनंत।
कई पौराणिक कथाओं में शिव के तांडव नृत्य, समाधि, या त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) में उनकी भूमिका का वर्णन है, लेकिन कहीं भी उनकी मृत्यु की बात नहीं आती। बल्कि, वे समय और मृत्यु दोनों पर विजय पाए हुए माने जाते हैं।
शिव की अवधारणा इतनी गहरी है कि वे न केवल देवता हैं, बल्कि स्वयं ब्रह्म हैं — वह सत्ता जो सबकुछ में व्याप्त है।
इसलिए, श
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