इस्लाम में ईश्वर का स्वरूप
इस्लामिक धर्मशास्त्र के अनुसार ईश्वर यानी अल्लाह का कोई भौतिक शरीर नहीं होता। वह रूप, आकार और स्थान के बंधनों से पूरी तरह से परे है। किसी भी चित्र, मूर्ति या मानवीय कल्पना के ज़रिए उसके रूप को नहीं दर्शाया जा सकता, क्योंकि इंसानी दिमाग जिस भी चीज़ की कल्पना कर सकता है, ईश्वर उससे बिल्कुल अलग और अद्वितीय है।
इस्लाम में यह स्पष्ट रूप से माना जाता है कि ईश्वर का कोई लिंग (Gender) नहीं है—वह न तो पुरुष है और न ही स्त्री। हालाँकि, अरबी और कई अन्य भाषाओं की व्याकरणिक बनावट के कारण उनके लिए पुल्लिंग शब्दों (जैसे 'वह') का उपयोग किया जाता है, लेकिन यह केवल भाषा की सीमा है, न कि उनके पुरुष होने का संकेत।
संक्षेप में कहें तो, इस्लाम में ईश्वर की अवधारणा यह सिखाती है कि उसकी तुलना ब्रह्मांड की किसी भी चीज़ या प्राणी से नहीं की जा सकती। वह सर्वव्यापी, निराकार और अद्वितीय है, जिसका कोई अंत या शुरुआत नहीं है।
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