झगड़े के बाद क्या करें?

रिश्तों में झगड़ा कभी-कभी तो अपरिहार्य हो जाता है। लेकिन इसके बाद क्या करें, यही असल मायने रखता है। कई बार भावनाएँ इतनी उमड़ती हैं कि तुरंत बात करके मामला सुलझाने की कोशिश की जाती है, लेकिन यह गलती हो सकती है।

गर्मागर्म दिमाग में कोई फैसला न लें।

एक छोटा सा समय लेना कई बार सबसे बड़ा इलाज होता है। अगर आप या आपका सामने वाला भावनाओं में बह रहा है, तो बातचीत और भी बिगड़ सकती है। इसलिए ठंडे दिमाग से सोचने के लिए थोड़ा समय लेना बेहतर होता है।

समय देने का मतलब दूर होना नहीं।

यह ज़रूरी नहीं कि आप दूर जाएँ या बात बंद कर दें, लेकिन बस थोड़ी देर के लिए चुप रहें। इस दौरान आप अपनी भावनाओं को समझ सकते हैं और सामने वाले के नजरिए को भी समझने की कोशिश कर सकते हैं।

जब दोनों का दिमाग ठंडा हो जाए, तब खुलकर बात करें। नरम लहजे में बात करने से तनाव कम होता है और समाधान आसानी से निकल आता है।

याद रखें—झगड

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