कृष्ण की बांसुरी आज कहां है?
भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी की असली पहचान आज भी एक रहस्य बनी हुई है। मान्यता है कि वह पवित्र बांसुरी कभी किसी के हाथ नहीं लगी, बल्कि एक महान ऋषि द्वारा समाधि लेने से पहले स्वयं मंदिर को सौंप दी गई थी। यह बात आज भी भक्तों के बीच गूंजती है और उस पावन स्थान की आस्था को और गहरा देती है।
यह मंदिर न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है, बल्कि आस्था का केंद्र भी है। यहां हर शनिवार और रविवार को डंडा स्पर्श का विशेष आयोजन होता है। इस दौरान मंदिर आने वाले भक्तों के सिर पर पवित्र डंडा रखा जाता है, जिसे मनोकामना पूर्ति का मार्ग माना जाता है। लोग इस अनुष्ठान में विश्वास रखते हैं और आशीर्वाद पाने के लिए दूर-दूर से आते हैं।
कुछ लोग कहते हैं कि बांसुरी तो अब भौतिक रूप में नहीं रही, लेकिन उसकी ध्वनि आज भी भक्तों के हृदय में गूंजती है। जैसे कृष्ण ने बृंदावन में अपनी बांसुरी के स्वर से गोपियों को मोह लिया था, वै
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