मां काली और भगवान शिव का गहरा संबंध
भगवान शिव की चौथी पत्नी मां काली को माना जाता है। यह संबंध सिर्फ एक वैवाहिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति और संहार का प्रतीक है। मां काली को शक्ति का सबसे भयंकर और दिव्य स्वरूप माना जाता है।
एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक दानव था जिसका नाम रक्तबीज था। इसके रक्त की एक बूंद अगर धरती पर गिर जाती, तो उससे हजारों रक्तबीज पैदा हो जाते। इस तरह लड़ाई अनंत हो जाती। तब मां काली ने उग्र रूप धारण किया और युद्ध में उसके रक्त को अपने मुंह से पी लिया, ताकि एक भी बूंद धरती पर न गिरे। इस तरह उन्होंने ब्रह्मांड को विनाश से बचाया।
मां काली भगवान शिव की शक्ति हैं, और उनका रूप भय का नहीं, बल्कि संरक्षण का है। कहा जाता है कि जब धर्म के खिलाफ अधर्म अपनी चरम सीमा पर होता है, तो काली माता प्रकट होती हैं।
हालांकि काली माता का स्वरूप भयानक लगे, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए एक ममतामयी माँ के रूप में होती हैं। उनकी पूजा
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