कंस का असली नाम: एक जन्मांतर की कहानी

कंस, जो श्रीकृष्ण के काल के सबसे प्रसिद्ध राक्षसों में से एक माने जाते हैं, वास्तव में एक पूर्व जन्म में कालनेमि नामक असुर थे। कालनेमि विरोचन के पुत्र थे और उनका नाम देवताओं के लिए डर का प्रतीक था।

एक बार देवासुर संग्राम के दौरान, कालनेमि ने सिंह पर सवार होकर भगवान विष्णु पर बड़े वेग से त्रिशूल चला दिया। लेकिन भगवान हरि ने उस त्रिशूल को हवा में ही पकड़ लिया और उसी हथियार से कालनेमि और उसके वाहन का वध कर दिया। इस प्रकार उनका अंत हुआ।

लेकिन यही अंत नहीं था। कालनेमि के पापों और घृणा के बावजूद, उन्हें नए जन्म में एक नए रूप में अवतरित होने का अवसर मिला। वही आत्मा फिर पृथ्वी पर कंस के रूप में जन्मी। उनकी कहानी यह बताती है कि धर्म और अधर्म का महायुद्ध अक्सर जन्मों-जन्मांतर में चलता रहता है।

कंस का जीवन और मृत्यु भी भगवान कृष्ण के अवतार के उद्देश्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभ

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