सुदामा और श्रीकृष्ण की अनन्य मित्रता
त्रेता युग में नहीं, बल्कि द्वापर युग में सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे। वे भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल के मित्र थे। गुरुकुल में अध्ययन करते समय दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे। हालांकि समय के साथ श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बने, लेकिन सुदामा की दशा बहुत दयनीय रही।
गरीबी के बीच रहते हुए भी सुदामा ने सदा धर्म और सच्चाई का पालन किया। विवाह के बाद भी वे अपनी पत्नी सुशीला और बच्चों के साथ सादा जीवन जीते रहे। कभी भी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। फिर भी, जब घर में भूख और बुराई ने दस्तक दी, तो सुशीला ने सुदामा को अपने मित्र श्रीकृष्ण से मदद मांगने के लिए कहा।
सुदामा ने केवल आठ मुठी चावल लेकर द्वारिका की ओर प्रस्थान किया। लेकिन श्रीकृष्ण ने अपने मित्र के आगमन को बड़े प्रेम से स्वीकार किया। उन्होंने न तो सुदामा से मदद की बात की, न ही उनकी गरीबी देखकर लज्जित किया। बस उनके प्रेम और सेवा ने सब कुछ बदल दिया।
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