सुदामा के पैरों में जूते क्यों नहीं थे?

सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता आज भी निस्वार्थ प्रेम और विश्वास की मिसाल है। दोनों बचपन में गुरुकुल में एक साथ पढ़े थे, लेकिन जीवन ने उनके रास्ते अलग-अलग कर दिए। जहां श्रीकृष्ण द्वारका के राजा बने, वहीं सुदामा गरीबी के अंधेरे में जीवन बिता रहे थे।

उनके पैरों में जूते न होने का कारण उनकी दरिद्र दशा थी।

एक ऐसा समय आया जब सुदामा के पास खाने तक कुछ नहीं था। उनकी पत्नी ने समझाया कि वे अपने पुराने मित्र श्रीकृष्ण के पास मदद मांगने जाएं। इसी उम्मीद के साथ सुदामा द्वारका के लिए निकल पड़े। फटी धोती, बिना ऊपर के वस्त्रों के और पैरों में जूते बिना — वे इसी तरह श्रीकृष्ण के द्वार पहुंचे।

उनकी गरीबी इतनी गहरी थी कि न तो उनके पास नए कपड़े थे, न ही कोई जूते। यह न तो किसी धार्मिक नियम के कारण था, न ही किसी साधु जैसी छवि के लिए — बल्कि सादगी और दरिद्रता के कारण वे इस तरह चले आए।

लेकिन श्रीकृष्ण ने उनकी

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