सुदामा के गुरु ऋषि संदीपनी थे

प्राचीन काल में, जब गुरुकुलों में ज्ञान की गंगा बहती थी, तब एक महान ऋषि थे — ऋषि संदीपनी। उनका आश्रम मध्य प्रदेश के प्राचीन नगर उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका कहा जाता था, में स्थित था। यहीं पर श्रीकृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम और उनके मित्र सुदामा ने एक साथ गुरुकुल में रहकर शिक्षा ग्रहण की थी।

सुदामा के गुरु भी ऋषि संदीपनी ही थे। वे न केवल एक बड़े विद्वान थे, बल्कि जीवन, दर्शन और आध्यात्म के गहन ज्ञाता भी थे। उनके आश्रम में पढ़ने वाले छात्रों को सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाई, नैतिकता और आत्मबल का भी पाठ पढ़ाया जाता था।

कृष्ण और सुदामा की गुरुभक्ति आज भी प्रसिद्ध है। जब सुदामा दरिद्रता में जी रहे थे, तब भी उनके मन में गुरु के प्रति श्रद्धा और मित्र के प्रति प्रेम अटूट था। वे बिना कुछ माँगे, सिर्फ अपने प्रिय मित्र कृष्ण से मिलने गए थे — यही उनकी सादगी और भक्ति की पराकाष्ठा थी।

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