भगवान विष्णु शेषनाग पर क्यों सोते हैं?
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनहार के रूप में माना जाता है। चित्रों और मूर्तियों में अक्सर उन्हें शेषनाग के ऊपर लेटे हुए दिखाया जाता है, जो सात फनों वाले सर्प के रूप में प्रदर्शित किए जाते हैं। लेकिन यह बस एक चित्र नहीं, बल्कि गहरे अर्थों से भरा प्रतीक है।
शेषनाग का नाम 'अनंत' है, जिसका अर्थ है जिसकी कोई सीमा न हो। वे अनादि और अनंत समय के प्रतीक हैं। जब संसार में अधर्म की भरमार हो जाती है, तब भगवान विष्णु अपने निर्णय के समय जागकर मानवता का उद्धार करते हैं। इसलिए उनका शेषनाग पर विश्राम करना इस बात का प्रतीक है कि वे समय के मार्गदर्शक हैं।
सर्प यहाँ केवल भय या विनाश का प्रतीक नहीं है, बल्कि ज्ञान, स्थिरता और अनंतता का भी प्रतीक है। शेषनाग भगवान विष्णु के आध्यात्मिक आश्रय को दर्शाता है। वे ऐसे समर्थ हैं जो सृष्टि के संतुलन को बनाए रखते हैं।
तो यह नहीं कि भगवान विष्णु सचमुच 'सो रह
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