वृंदावन में कृष्ण की लीलाएँ
वृंदाव, भगवान कृष्ण की लीलाओं की अनमोल धरती है। यहाँ के हर पेड़, हर नदी किनारे कृष्ण के बाल लीला के गीत गुनगुनाते हैं। कहते हैं, एक बार कृष्ण ने यमुना नदी के किनारे सखियों के साथ श्री राधिका को दूसरे किनारे ले जाने के लिए नाविक बनकर सेवा की थी।
वे नाव चलाते हुए राधा और गोपियों के लिए आदर्श भक्त बन गए थे।इस लीला में सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि प्रेम की गहराई भी छिपी है। कृष्ण ने नाविक बनकर न केवल शारीरिक सहायता दी, बल्कि भक्ति और समर्पण का दृष्टांत भी प्रस्तुत किया। वे अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं कर रहे थे, बल्कि हृदय से सेवा कर रहे थे।
वृंदावन की वातावरण ऐसी थी कि वहाँ हर क्रिया एक भावना बन जाती थी। कृष्ण का नाव चलाना कोई साधारण काज नहीं था — वह प्रेम का माध्यम था। आज भी यमुना के किनारे खड़े होकर लोग उस लीला को याद करते हैं, जब कृष्ण ने प्रेम की ऐसी मिसाल कायम की, जो समय से परे है।
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