वृंदावन की धरती और श्रीकृष्ण की लीलाएं
वृंदावन जाते ही मन में एक नाम तैर आता है – श्रीकृष्ण। यहाँ की हर सांस, हर पगडंडी, हर पीपल का पेड़ उन्हीं की लीलाओं की कहानी कहता है। यमुना का वह साँवला पानी, जो धीरे-धीरे बहता है, मानो आज भी कृष्ण के बचपन की मस्ती बयान कर रहा है।
कहते हैं, जब कृष्ण छोटे थे, तो वे गोपियों के घरों में छुपकर माखन के मटके तोड़ देते थे। गोपियाँ नाराज होतीं, लेकिन उनकी आँखों में क्रोध नहीं, प्यार झलकता था। वृंदावन की वही धरती आज भी उन शरारतों की गूंज सुनाती है।
और फिर वह रात… जब वृंदावन में रासलीला का अनूठा दृश्य हुआ। चाँदनी रात, नटवर नागर और गोपियों के साथ नृत्य – यह दृश्य आज भी किसी भक्त के हृदय में जी उठता है।
वृंदाव सिर्फ एक जगह नहीं, एक भावना है। यहाँ हर पत्ता कृष्ण का नाम गुनगुनाता है, हर हवा उनकी बाँसुरी की धुन लिए चलती है। जो व्यक्ति वृंदावन जाता है, उसकी आत्मा तक में कृष्ण क
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