हनुमान जी को आग क्यों नहीं जला सकी?

जब हनुमान जी लंका में सीता माता का पता लगाने गए, तो रावण को चेतावनी देने के लिए उन्होंने लंका को आग के हवाले कर दिया। यह घटना 'हनुमान बर्न्स लंका' के नाम से जानी जाती है। लेकिन एक अद्भुत बात यह थी कि जिस आग ने लंका के महलों, भवनों और वृक्षों को भस्म कर दिय, वह हनुमान जी के शरीर को छू भी नहीं सकी।

इस पर हनुमान जी खुद आश्चर्यचकित हुए। वे सोचने लगे कि आखिर आग मेरे शरीर को क्यों नहीं छू रही? फिर उन्हें एहसास हुआ—यह उनकी अपनी शक्ति नहीं, बल्कि सीता माता की कृपा और राम की महिमा का प्रभाव है। उनकी भक्ति, श्रद्धा और राम-सेवा की निष्ठा ने उन्हें आग से भी ऊपर कर दिया था।

यह कहानी सिर्फ एक चमत्कार नहीं बताती, बल्कि यह भी सिखाती है कि जब कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से भगवान की सेवा में लग जाता है, तो प्रकृति के नियम भी उसके लिए टूट जाते हैं। हनुमान जी की अटूट श्रद्धा ने न सिर्फ लंका जलाई, बल्कि

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