हनुमान जी के पुत्र: मकरध्वज की अनसुनी कथा

हनुमान जी को ब्रह्मचारी के रूप में जाना जाता है, लेकिन पुराणों में उनके एक पुत्र का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि लंका के युद्ध के दौरान जब हनुमान जी अहिरावण के पास बंदी थे, तब एक राक्षसी ने उनके पसीने की बूंद से एक बच्चे को जन्म दिया। इस बच्चे का नाम मकरध्वज रखा गया।

मकरध्वज का जन्म अलौकिक था। उसके शरीर पर एक मकर का निशान था, जिसके कारण उसका नाम पड़ा। उसने बाद में अहिरावण की सेना में बल का प्रतीक बनकर काफी नाम कमाया। कुछ मान्यताओं के अनुसार, जब हनुमान जी ने उसे पहचान लिया, तो उन्होंने उसका आशीर्वाद दिया, लेकिन साथ ही उसे युद्ध में पराजित भी किया।

हालांकि यह कथा सभी ग्रंथों में नहीं मिलती, फिर भी ओडिशा और दक्षिण भारत के कुछ स्थानीय मंदिरों में मकरध्वज की चर्चा होती है। यह कथा हनुमान जी के केवल भक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि शक्ति, त्याग और धर्म के गहरे रंग को भी दर्शाती है।

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