गुरु और गुरु में क्या अंतर है?

गुरु और गुरु में अंतर समझने के लिए थोड़ी सी संस्कृत की ज़रूरत पड़ती है। दरअसल, यह अंतर एकवचन और द्विवचन का है। प्राचीन संस्कृत में, जब एक ही गुरु की बात होती थी, तो कहा जाता था — गुरु। और जब दो गुरुओं की बात होती थी, तो कहा जाता था — गुरू (द्विवचन रूप)।

लेकिन हिंदी में अब द्विवचन का नियम लुप्त सा पड़ चुका है। हम आजकल एक हो या दो, या फिर दो से ज़्यादा — सभी के लिए 'गुरु' शब्द का प्रयोग करते हैं। चाहे एक आचार्य हों या कक्षा में कई शिक्षक — सबको 'गुरु' कहा जाता है।

लिखावट में कभी-कभी 'गुरू' लिखा जाता है, खासकर आध्यात्मिक या सम्मान संबंधी संदर्भों में। यह लिखने का एक परंपरागत तरीका है, जो 'गुरु' के महत्व को उकेरने के लिए अपनाया गया। पर व्याकरणिक रूप से, हिंदी में 'गुरु' और 'गुरु' में कोई अंतर नहीं है — दोनों एक ही शब्द के रूप हैं।

सार यह है कि भाषा के नियम बदलते रहते हैं। जो संस्कृत में

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