माता-पिता से बड़ा कोई नहीं
एक प्रश्न अक्सर दिमाग में आता है – गुरु से बड़ा कौन होता है? इसका उत्तर भारतीय संस्कृति और पुराणों में छिपा है। कथा व्यास कहते हैं कि शास्त्रों के अनुसार, सबसे बड़े हैं भगवान। भगवान से बड़ा है गुरु, क्योंकि गुरु भगवान तक का द्वार खोलता है। लेकिन गुरु से भी बड़ा है पिता, और पिता से भी बड़ी है माता।
हाँ, माता का स्थान सबसे ऊंचा है। वही वह प्रथम गुरु है जो बच्चे को जीवन की पहली सीख देती है। रामायण में भगवान श्रीराम के जीवन से इसकी पुष्टि होती है। प्रतिदिन सुबह उठकर वे पहले माता-पिता के चरण स्पर्श करते थे, फिर गुरु को नमन करते थे।
यह क्रम सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि आदर का क्रम है। माता-पिता वह प्रथम आश्रय हैं जिन्होंने हमें जीवन दिया, संस्कार दिए और भगवान के रास्ते पर चलाया। गुरु चाहे कितने भी महान क्यों न हों, पर माता का त्याग, पिता की तपस्या से आगे कोई नहीं।
इसलिए, जब भी संदेह हो कि किसे सर्वोपरि मानें, तो य
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