भारत की पहली लड़की स्कूल कब गई?

भारत में लड़कियों की शिक्षा का इतिहास एक महत्वपूर्ण संघर्ष है। 1 जनवरी, 1848 को एक ऐतिहासिक दिन था, जब महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने पुणे के भिडे वाड़ा में देश का पहला लड़कियों का स्कूल शुरू किया। यह कदम उस समय के सामाजिक ढांचे के खिलाफ था, जब लड़कियों को पढ़ने का अधिकार नहीं था।

सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका बनीं और उन्होंने न सिर्फ पढ़ाना शुरू किया, बल्कि समाज के तिरस्कृत वर्गों जैसे दलित बच्चों के लिए भी शिक्षा के द्वार खोले। उनके साहस के आगे समाज के कठोर रूढ़िवादी विचार भी झुक गए।

इस स्कूल के शुरू होने के बाद धीरे-धीरे लड़कियों की शिक्षा के प्रति जागरूकता फैली। ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले का योगदान न केवल शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि समाज में समानता की भावना जगाने में भी अतुलनीय रहा।

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