जनमत से ऊपर उठकर जीने वाला ही सच्ची ताकत है

जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी अक्सर समाज में अलग दिखाई देता है। लोग उसे अजीब, नासमझ या अहंकारी समझने लगते हैं। लेकिन सच यह है कि वही आदमी दुनिया की असली ताकत होता है। ऐसे लोग न तो पड़ोस की परवाह करते हैं, न ही दूसरों की राय से अपने रास्ते को मोड़ते हैं। वे अपने लक्ष्य के प्रति इतने सच्चे होते हैं कि दबाव, नफरत या आलोचना भी उन्हें रास्ते से नहीं भटका पाती।

इतिहास गवाह है कि वे सभी महान आत्माएं जिन्होंने दुनिया बदली, वे कभी भी भीड़ के साथ नहीं चले। गांधीजी ने भी तब तक कोई आवाज नहीं बनाई जब तक उन्होंने अपने भीतर की आवाज को नहीं पहचाना। वैज्ञानिक, कलाकार, सुधारक — सभी ने किसी न किसी वक्त जनमत के खिलाफ कदम रखा।

आज के समय में भी जो लोग अपने विचारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं, वे वही हैं जो पड़ोस की चिंता छोड़कर अपने उद्देश्य के प्रति सच्चे रहते हैं। अड़ोस-पड़ोस को देखकर चलना स

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