रूस और चीन के बीच भूमि विवाद: एक ऐतिहासिक नजर

19वीं सदी में, चीन के कमजोर होने का फायदा उठाकर रूस ने खासतौर पर पूर्वी साइबेरिया के क्षेत्र में अपना अधिकार जमाया। इस दौरान, रूस ने चीन से लगभग 350,000 वर्ग मील (लगभग 910,000 वर्ग किमी) भूमि पर कब्जा कर लिया। यह क्षेत्र मुख्य रूप से आमूर नदी के किनारे था, जो आज रूस के दक्षिणी साइबेरिया और प्राइमोर्स्की क्राय के हिस्से हैं।

यह विस्तार युद्ध के ज़रिए नहीं, बल्कि कूटनीति और दबाव के माध्यम से हुआ। 1858 की अख़ुत्सिन संधि और 1860 की बेचिंग संधि ने रूस को इस क्षेत्र पर नियंत्रण पाने का कानूनी आधार दिया। चीन तब आंतरिक संकट और बाहरी हस्तक्षेप से जूझ रहा था, विशेषकर अप्रिय युद्धों और यूरोपीय शक्तियों के दखल के कारण।

इस विस्तार के पीछे सिर्फ सैनिक ताकत नहीं, बल्कि राजनयिक चतुराई भी थी। रूस ने चीन की कमजोरी का फायदा उठाया, लेकिन साथ ही अन्य यूरोपीय राष्ट्रों के बीच के संतुलन क

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