सत्य और सही में अंतर

हम अक्सर सत्य और सही शब्दों का उपयोग एक दूसरे के स्थान पर कर देते हैं, लेकिन दोनों में स्पष्ट अंतर है। सत्य का अर्थ होता है—सच या वह बात जो वास्तव में है। जैसे, अगर कोई कहता है कि पृथ्वी गोल है, तो यह एक सत्य है क्योंकि यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है।

लेकिन सही का अर्थ थोड़ा अलग है। यह नैतिक या तार्किक सहीता पर आधारित होता है। कोई बात सत्य हो सकती है, लेकिन वह सही नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए, अगर कोई गलत काम करके उसे स्वीकार कर ले, तो यह सत्य है कि उसने ऐसा किया, लेकिन यह काम नैतिक रूप से सही नहीं है।

इसके अलावा, संस्कृत में ‘सत्’ का अर्थ है—अच्छा, श्रेष्ठ या वास्तविक। इसी से बना शब्द ‘सत्य’ वह है जो वास्तव में है और जो आत्मा तक पहुंचाने वाला हो। फलों के रस को भी ‘सत’ कहा जाता है—जैसे गन्ने का सत। इसका मतलब वह अंतिम सार या सारतत्व होता है।

इसलिए, सत्य जानना जरूरी है, लेकिन सही कर्म करना उससे

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