आलम आरा: 90 साल बाद भी जिंदा यादें
14 मार्च, 1931 की वो तारीख भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। इसी दिन भारत की पहली टॉकी, आलम आरा, रिलीज़ हुई थी। निर्देशक अर्देशिर ईरानी की इस महत्वाकांक्षी फिल्म ने साइलेंट सिनेमा की दुनिया में आवाज़ का जादू भर दिया। लोगों ने पहली बार पर्दे पर गाने, संवाद और संगीत सुना — और वो अनुभव ऐतिहासिक था।
लेकिन आज, 90 साल बाद, एक दुखद सच ये है कि आलम आरा का एक भी प्रिंट आज उपलब्ध नहीं है। भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार के मुताबिक, इस ऐतिहासिक फिल्म का कोई भी कॉपी जीवित नहीं बचा। ये सोचकर दुख होता है कि वो फिल्म, जिसने भारतीय सिनेमा में क्रांति ला दी, आज किसी के पास नहीं है।
फिर भी, आलम आरा की यादें मौन नहीं हैं। उसके गीत, कहानी और नाटकीय अंदाज़ आज भी किताबों, लेखों और बुजुर्गों की यादों में जिंदा हैं। ये फिल्म सिर्फ एक फिल्म नहीं थी — ये एक सपना था, जिसने भारतीय सिनेम
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