भारत में बेटे की तुलना में बेटियों के प्रति पक्षपात क्यों?

भारत में बेटे की तुलना में बेटियों के प्रति पक्षपात एक गहरी सांस्कृतिक जड़ रखता है। सदियों से चले आ रहे विश्वासों के अनुसार, एक लड़का परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाता है, माता-पिता की वृद्धावस्था में देखभाल करता है और अंतिम संस्कार तक करता है। इसके बजाय, कई परिवारों का मानना है कि बेटी विवाह के बाद अपने ससुराल चली जाती है और इसलिए उसमें निवेश करना "खर्च" लगता है।

यही कारण है कि दहेज की प्रथा आज भी कई जगहों पर जीवित है। कई परिवार बेटी के जन्म पर चिंतित हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें भविष्य में विवाह और दहेज के खर्च का डर सताता है। स्थिति इतनी गहरी है कि कुछ जगहों पर लड़कियों के जन्म से पहले ही लिंग आधारित भ्रूण निर्वाहन जैसी गलत प्रथाएं भी देखी जाती हैं।

हालांकि, समय बदल रहा है। शहरी क्षेत्रों में शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के कारण महिलाओं की छवि बदल रही है। अब बहुत से परिवार अप

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