भगवान को कैसे देखा जा सकता है?

भगवान को देखने का मतलब आँखों से नहीं, बल्कि हृदय से महसूस करना होता है। अक्सर हम सोचते हैं कि भगवान कहीं ऊपर आकाश में छिपे हैं, लेकिन सच तो यह है कि वह हमारे भीतर ही बसे हैं। उन्हें तब पाया जा सकता है जब दिल से लालच, अहंकार और माया को धोकर सिर्फ उनके चरणों में लगन भर ली जाए।

ईश्वर तक पहुँच की सच्ची राह है — ध्यान और भक्ति। जब मन शांत हो, विचार शुद्ध हों और आत्मा उनके नाम में लीन हो जाए, तब वह अनुभूति आती है। यह अनुभूति न तो पुस्तकों में छिपी है, न ही मंदिरों में। यह तो एक साफ दिल और निष्ठा भरे ध्यान में छिपी है।

जैसे एक दीपक अंधेरे को मिटा देता है, वैसे ही सच्चे भक्त के हृदय में ईश्वर का प्रकाश खुद-ब-खुद जगमगा उठता है। इसलिए बाहर तलाशने की बजाय भीतर झांकिए। भगवान उसी को दिखाई देते हैं, जो उन्हें पाने के लिए खुद को भूल जाता है। एकाग्रता, प्रेम और विनम्रता के साथ ध्यान करें — वह दरवाजा

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