क़यामत का दिन: इस्लाम की नजर में अंतिम सच्चाई

इस्लाम में क़यामत का दिन एक गहरी आध्यात्मिक अवधारणा है। मुसलमान मानते हैं कि एक दिन पूरी सृष्टि का अंत होगा, और यह दिन अल्लाह की इच्छा से आएगा। कुरान में इसे “यौम-अल-क़यामा” कहा गया है, जिसका अर्थ है "उठाने का दिन", क्योंकि इस दिन मृत लोग फिर से जीवित होकर अपने कर्मों के हिसाब में खड़े होंगे।

इस दिन के बारे में कुरान में कई निशानियाँ बताई गई हैं – जैसे सूरज का उल्टा चलना, आसमान का फटना, और कब्रों से लाशें निकलना। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दिन कब आएगा, यह जानकारी सिर्फ अल्लाह के पास है। न फरिश्ते, न पैगंबर, बल्कि कोई भी मनुष्य इसकी सही तारीख नहीं बता सकता।

क़यामत के बाद सभी लोगों का हिसाब होगा। जिनके अच्छे कर्म ज्यादा होंगे, उन्हें जन्नत मिलेगी, और जिनके बुरे कर्म भारी होंगे, वे दुज्ज़त (नरक) में जाएंगे। यह विश्वास मुसलमानों के लिए नैतिक जीवन जीने की प्रेर

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