मूलांकुर का महत्वपूर्ण योगदान
जब बीज अंकुरित होता है, तो सबसे पहले जो भाग निकलता है, वह होता है मूलांकुर। यह नन्ही जड़ के रूप में दिखाई देता है, लेकिन इसका काम बहुत बड़ा होता है। मूलांकुर मिट्टी में फैलकर पानी और आवश्यक पोषक तत्वों को जड़ों के माध्यम से पौधे में खींचता है। यह प्रक्रिया अंकुरित हो रहे पौधे के लिए जीवनदायिनी साबित होती है।
बिना मूलांकुर के, नए पौधे को मिलने वाला भोजन और जल की आपूर्ति नहीं हो पाएगी। यही वजह है कि यह नाजुक जड़ पौधे के शुरुआती जीवन में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह केवल पानी ही नहीं, बल्कि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस जैसे तत्वों को भी सोखकर पौधे के ऊपरी हिस्सों, खासकर नई पत्तियों तक पहुँचाता है।
इस तरह मूलांकुर प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को शुरू करने में भी सहायता करता है। जब तक पौधा अपनी जड़ें मजबूत नहीं बना लेता, तब तक मूलांकुर ही उसकी जीवन रेखा बना रहता है। छोटा होने के बावजूद,
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