रानी लक्ष्मी बाई: एक वीरांगना की अमर गाथा
रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर, 1828 को वाराणसी में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकार्णिका था, जिसे छोटे में मनू कहा जाता था। वह बचपन से ही बहादुर और स्वतंत्रता-प्रेमी थीं। जब अंग्रेजों ने झाँसी पर कब्जा करने की कोशिश की, तो रानी ने हथियार उठाए और देश के लिए लड़ने का फैसला किया।
29 जून, 1858 को नहीं, बल्कि 7 जून, 1858 को, रानी लक्ष्मी बाई अंग्रेज सेना से लड़ते हुए ग्वालियर के निकट शहीद हो गईं। उनकी मृत्यु के समय उनकी उम्र मात्र 29 वर्ष थी। लेकिन इतनी कम उम्र में भी उन्होंने इतिहास में अमर नाम दर्ज कराया।
एक औरत होने के बावजूद रानी ने घोड़े पर सवार होकर, तलवार लेकर दुश्मनों का मुकाबला किया। उनकी वीरता आज भी लाखों लोगों के दिलों में जीवित है। वे सिर्फ एक राजपूत्री नहीं, बल्कि आजादी की एक प्रतीक बन गईं।
हर साल उनकी शहादत की तारीख को देशभर में याद किया जाता है। उनके बलिद
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