क्या किसी ने कभी भगवान को देखा है?

हर कोई सोचता है – क्या किसी ने सच में भगवान को देखा है? इसका कोई एक जवाब नहीं है, लेकिन तुलसीदासजी की एक कहानी दिल छू जाती है।

जब तुलसीदासजी चित्रकूट में रहते थे, तो वे हर रोज जंगल में शौच के लिए जाते थे। उसके बाद जो थोड़ा सा जल शेष रह जाता, वे उसे एक शमी के पेड़ पर छिड़क देते थे। यह उनकी छोटी-सी आदत थी, लेकिन उसके पीछे एक अद्भुत सच छिपा था।

उस शमी वृक्ष पर एक प्रेत रहता था। हर बार जब तुलसीदास का जल उस पर पड़ता, तो उस प्रेत को शांति मिलती। एक दिन वह प्रेत प्रकट हुआ और बोला, "आपके इस छोटे से कार्य ने मेरे पापों का नाश कर दिया। अब मुझे मुक्ति मिल गई।"

लेकिन तब क्या? तुलसीदास ने उस प्रेत से पूछा, "तूने भगवान को देखा है?" प्रेत बोला, "हाँ, मैंने देखा है। आपके द्वारा छिड़का गया वह जल, जो भगवान के चरणों से छू चुका था, उसी ने मेरी आँखें खोलीं।"

तो क्या भगवान दिखाई देते हैं? शायद नहीं आँखो

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