भारत में तेल भंडार और उसकी आयात पर निर्भरता
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यह बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर है। देश में कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का 60% से अधिक हिस्सा केवल पश्चिम एशिया के देशों—विशेष रूप से इराक, ईरान और सऊदी अरब—से आयात किया जाता है।
ऐतिहासिक रूप से और भू-वैज्ञानिक कारणों से भारत के पास मध्य पूर्व के देशों जितना विशाल घरेलू खनिज तेल भंडार नहीं है। इसके अलावा, जिन देशों से भारत को तेल की आपूर्ति होती है, वे अक्सर राजनीतिक अस्थिरता, गृहयुद्ध और विभिन्न क्षेत्रीय संकटों से घिरे रहते हैं। जब इन देशों में उत्पादन प्रभावित होता है, तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और बाजार पर पड़ता है।
यही वजह है कि भारत सरकार अब ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) का विस्तार करना और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) को मजबूत करना शामिल है, ताकि वैश्विक संकट के समय देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखा जा सके।
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