भारत में आधुनिक शिक्षा की शुरुआत
भारत में आधुनिक शिक्षा प्रणाली की नींव 1857 में पड़ी, जब कलकत्ता, बंबई और मद्रास में पहले तीन विश्वविद्यालय स्थापित किए गए। ये संस्थान अंग्रेजी शिक्षा पद्धति पर आधारित थे और इनका मकसद भारतीयों को ब्रिटिश प्रशासन के लिए योग्य बनाना था। हालाँकि, इस समय तक भी प्राथमिक शिक्षा की स्थिति नाममात्र के स्तर तक सीमित थी।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए, 1882 में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय शिक्षा आयोग की स्थापना की। इस आयोग की अध्यक्षता सर विलियम विल्सन हंटर ने की। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य भारत में शिक्षा की दशा का आकलन करना और भविष्य के लिए सुझाव देना था। आयोग ने प्राथमिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और स्थानीय स्तर पर स्कूलों के विस्तार की सिफारिशें कीं।
हंटर आयोग की रिपोर्ट भारतीय शिक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। इसने प्राथमिक शिक्षा को गंभीरता से लेने की दिशा में पहला कदम था। ये सिफारिशें भले ही पूरी तरह
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