पृथ्वी को मां क्यों कहते हैं?

पृथ्वी को मां कहने की परंपरा हमारी संस्कृति की गहरी जड़ों में है। हम इसे मातृभूमि कहते हैं, क्योंकि जिस तरह माँ अपने बच्चे का पालन-पोषण करती है, उसी तरह पृथ्वी हम सबका पोषण करती है। यह हमें अनाज, फल, पानी और जीवन के लिए आवश्यक हर चीज देती है। इसलिए इसे आदर की दृष्टि से देखा जाता रहा है।

महाभारत में यक्ष प्रश्न के दौरान युधिष्ठिर से पूछा गया था – “आकाश से भी ऊँचा क्या है? और पृथ्वी से भी भारी क्या है?” इसके उत्तर में युधिष्ठिर ने कहा था कि मातृभूमि से भी भारी कुछ नहीं, क्योंकि वह सबकी माँ है। यह बात उस समय की गहरी आध्यात्मिक अनुभूति को दर्शाती है, जब पृथ्वी को केवल जमीन नहीं, बल्कि जीवनदाता माँ माना जाता था।

इसीलिए हम आज भी “मातृ भूमि” और “भारत माता” जैसे शब्दों का उपयोग करते हैं। ये केवल शब्द नहीं, बल्कि आदर और कृतज्ञता की भावना के प्रतीक हैं। पृथ्वी पर हमारा अधिकार नहीं, बल्कि उत्तरदायित

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