बचपन की वो यादगार गुड़ियाँ

बचपन की कुछ यादें ऐसी होती हैं जो दिल में कभी नहीं मिटतीं। लेखक के लिए भी ऐसी ही थी उनके मामा के गाँव जाने की। वो बचपन में बेहद उत्साह के साथ वहाँ जाते थे, लेकिन केवल प्रकृति या खुले स्थानों के लिए नहीं। उनके लिए वहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण थे बदलू काका।

बदलू काका वहाँ के प्रसिद्ध लाख के जहरी बनाने वाले कारीगर थे। उनके हाथों से निकलने वाली रंग-बिरंगी लाख की चूड़ियाँ और छोटी-छोटी गोलियाँ लेखक के लिए खजाने से कम नहीं थीं। हर बार जब लेखक गाँव जाते, तो बदलू काका उन्हें ढेर सारी चमक-दमक वाली चीज़ें देते।

उस समय की वो मासूम खुशी, जब हाथ में रंग-बिरंगी गोलियाँ होती और दिल में उमंग होती थी, आज भी याद आकर लेखक को मुस्कुरा देती है। बदलू काका के साथ बिताए पल, उनकी ममता और उनका कला-कौशल — सब कुछ लेखक के बचपन का अहम हिस्सा बन गया।

आज शायद ऐसे कारीगर कम दिखाई देते हैं, लेकिन उनकी यादें आज भी गुड़ियों क

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