गांधीजी का हिटलर को अंतिम संदेश

23 जुलाई, 1939 को महात्मा गांधी ने जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर को एक पत्र लिखा, जो इतिहास में शांति की एक अनसुनी अपील के रूप में याद किया जाता है। यह पत्र द्वितीय विश्व युद्ध से महज कुछ ही हफ्ते पहले लिखा गया था, जब यूरोप में युद्ध के बादल छा रहे थे।

गांधी ने पत्र में शांति की भावना के साथ हिटलर से अपील की कि वह युद्ध को रोकें। उन्होंने लिखा कि वे अपने दोस्तों के इसरार पर यह पत्र लिख रहे हैं, क्योंकि उनके मन में मानवता के प्रति गहरी चिंता थी। गांधी ने कहा कि वह एक साधारण व्यक्ति की तरह बोल रहे हैं, जो हिंसा के बजाय अहिंसा और सत्य पर विश्वास करता है।

हालांकि, यह पत्र हिटलर तक कभी नहीं पहुंचा। डाक व्यवस्था के माध्यम से भेजे गए इस पत्र के पहुंचने की कोई पुष्टि नहीं मिली। फिर भी, गांधी की यह हिम्मत और मानवता के प्रति उनका आह्वान आज भी प्रासंगिक है।

गांधी ने न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए शा

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