महात्मा गांधी का दमनकारी सरकार के खिलाफ संघर्ष

महात्मा गांधी को मार्च 1922 में ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था। इसका कारण था—उनके द्वारा 'यंग इंडिया' नामक पत्रिका में लिखे गए कुछ आलेख, जिनमें उन्होंने ब्रिटिश शासन की कड़ी आलोचना की थी। उनके शब्दों में ऐसी शक्ति थी कि सरकार उन्हें खतरनाक मानने लगी। गांधी को साबरमती आश्रम के पास से गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया।

उनके आलेख, जो सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित थे, लोगों में जागरूकता फैला रहे थे। ब्रिटिश सरकार को लगा कि अगर गांधी को रोका नहीं गया, तो आंदोलन और तेज हो जाएगा। इसलिए उन्हें छह साल की कैद की सजा सुनाई गई।

लेकिन जेल जाना गांधी के लिए कोई नई बात नहीं थी। वे जानते थे कि स्वतंत्रता के लिए बलिदान देना पड़ता है। जेल में भी वे अपने सिद्धांतों से नहीं डगमगाए। वहाँ भी उन्होंने सादा जीवन जीना जारी रखा, पढ़ाई-लिखाई की और ध्यान व योग के

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