गांधीजी और ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह

6 अप्रैल 1930 की वह सुबह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। उस दिन, महात्मा गांधी ने दांडी के समुद्र तट पर प्राकृतिक नमक उठाकर अंग्रेजी कानून की धज्जियां उड़ा दीं। यह कोई साधारण कार्य नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक प्रतीक था।

अंग्रेज सरकार ने नमक पर मनगढ़ंत कर लगा रखा था और आम आदमी को उसके बिना रहना पड़ता था। गांधीजी ने इस अन्याय के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। उनकी 24 दिनों की दांडी यात्रा, जो 12 मार्च 1930 को गुजरात के साबरमती आश्रम से शुरू हुई, उसी दिन समाप्त हुई।

नमक कानून तोड़ने का कार्य सिर्फ एक कार्रवाई नहीं था — यह एक संदेश था। गांधीजी ने साबित किया कि अहिंसा और धैर्य के जरिए कोई भी अन्याय समाप्त किया जा सकता है। इस घटना ने पूरे देश में आंदोलन की लहर दौड़ा दी। हजारों लोगों ने नमक बनाकर और बेचकर सरकारी कानूनों की अवहेलना की।

गांधीजी का यह ऐतिहासिक कदम आ

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