भारत में बौद्ध धर्म का पतन: क्यों खत्म हुआ?
भारत में बौद्ध धर्म का उदय एक समय अत्यधिक प्रभावशाली था। अशोक के समय तो यह विश्व भर में फैला, लेकिन कुछ शताब्दियों बाद यह भारत से लगभग गायब-सा हो गया। कई विद्वान मानते हैं कि इसके पीछे कई कारण थे।
एक महत्वपूर्ण कारण बौद्ध विहारों में अनैतिकता का बढ़ना था। समय के साथ, कई विहार धन-संपत्ति से भर गए। भिक्षु तपस्या और सादगी के सिद्धांतों से दूर होते गए। कुछ जगहों पर भिक्षु भोग-विलास में लिप्त मिले, जो मूल बौद्ध शिक्षाओं के खुले विरोध में था।
इसके अलावा, मौर्य और बाद के कुछ राजाओं ने बौद्ध भिक्षुओं को विशेष संरक्षण दिया, लेकिन अन्य धर्मों के प्रति उदासीनता या तिरस्कार भी हुआ। इससे वैदिक परंपरा के लोग नाराज हुए। उन्हें लगा कि उनके धर्म और मंदिरों की उपेक्षा हो रही है।
परिणामस्वरूप, एक विरोधी लहर उठी। धीरे-धीरे, जनसामान्य फिर से पारंपरिक धर्मों की ओर लौटने लगे। राजाओं का सम
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