इस्लाम: एकता और नैतिकता का धर्म
धर्म की बात करते हुए अक्सर लोग ऊंच-नीच या श्रेष्ठता की बात करते हैं, लेकिन इस्लाम इसके बिल्कुल उलट एकता, समानता और नैतिकता पर जोर देता है। इस्लाम मानता है कि इंसान की पहचान उसकी जाति, रंग या पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और नेकी से होती है।
इस्लाम में नीच और ऊंच की अवधारणा नहीं है।यहां श्रेष्ठ वह माना जाता है जो नेकी में सबसे आगे हो, जो अल्लाह से डरता हो, अच्छे काम करता हो और दूसरों के साथ न्याय करे। वहीं, जो व्यक्ति बुराई में आगे हो, अत्याचार करे या इंसानियत के खिलाफ हो, उसे नीच माना जाता है। यह नैतिकता का आधार है, न कि जन्म या पृष्ठभूमि पर आधारित कोई भेदभाव।
इस्लाम की ओर आने के लिए बहुत सारे कर्मकांड या जटिल नियम नहीं हैं। बस इतना आवश्यक है कि एक व्यक्ति पूरे दिल से इक़रार करे कि अल्लाह एक है और उसी की इबादत करने के योग्य है, और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उसके बंदे व
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