कृष्ण भगवान की पूजा कब करें?

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विशेष रूप से जन्माष्टमी के दिन मध्यरात्रि में की जाती है। पुराणों के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्र मास की कृष्ण अष्टमी की रात, रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसीलिए उनकी पूजा भी उसी समय की जाती है, जब वे धरती पर अवतरित हुए थे।

मध्यरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है। इस समय भक्त नटखट कन्हैया का स्वागत घर में एक छोटे झूले में बाल रूप में करते हैं। घरों में झूला झुलाया जाता है, भजन गाए जाते हैं और मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। कई लोग दिन भर व्रत रखते हैं और आधी रात के बाद पूजा करके व्रत खोलते हैं।

हालांकि, पूजा केवल जन्माष्टमी तक सीमित नहीं है। कृष्ण भक्त हर सुबह और शाम उनके नाम जपते हैं, भजन करते हैं और मंदिर जाकर दर्शन करते हैं। लेकिन सबसे शुद्ध और पवित्र माना जाता है वह पल, जब वे पहली बार इस धरती पर आए — मध्यरात्रि का समय।

इसलिए, अगर आप भगवान कृष्ण की विधिपूर्वक प

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